Posts

सेहरी व इफ्तार का टाइम टेबल राजगढ़ ज़िला धार मध्य प्रदेश इंडिया सन 2021

Image

नमाज़ टाइम टेबल लोकेशन

 

शबे बरात की फ़ज़ीलत

 *🍀शबे बरात की फ़ज़ीलत🍀*          *शबे बरात का हलवा*  📌इस मुबारक रात को फातिहा के लिए हलवा भी बनाया जाता है जिस पर कुछ लोग तरह तरह के एतराज़ भी करते हैं। शबे बरात के मौके पर हलवा बनाना न तो फ़र्ज़ है। न वाजिब है और न ही नाजायज़ है न हराम है बल्कि सच्ची बात यह है कि शबे बरात में दूसरे तमाम हलाल खानों की तरह हलवा बनाना भी एक जाईज़ और मुबाह काम है। और अगर नेक नियत के साथ हो कि एक उम्दा और अच्छा खाना फकीरो और मिसकीनों और अपने अहल व अयाल को खिला कर सवाब हासिल करें और रिशतेदारों को भेजकर तोहफा देने सिला रेहमी करने का सवाब हासिल करें तो यह खैर और सवाब का काम है और शरअन हरगिज़ मना नहीं बल्कि अच्छा और पसन्दीदा है। *◆ दरअसल शबे बरात पर हलवे का दसतूर इसलिए हुआ कि यह मुबारक रात सदका, खैरात ईसाले सवाब और सिला रहमी की खास रात है और इन्सान कि फितरत है कि खास खास मौके पर ख़ास और बहुत अच्छा खाना तैयार किया जाता है और المؤمن حلو ويحب الحلواء मोमिन हलावत और मिठास वाला है और मिठास को पसन्द करता है। यह बात ज़ाहिर है कि फ़ातिहा आमतौर पर शीरीनी पर कराई जाती है लिहाज़ा मुसलम...

Download file शाने हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रदियल्लाहु अन्हु.mp3

Download file शाने हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रदियल्लाहु अन्हु.mp3 : Download file शाने हज़रत अबु बकर सिद्दीक़ रदियल्लाहु अन्हु.mp3

लोटे या गिलास को पांच उंगलियों से अगर कोई पकड़ ले तो वो पानी पीना कैसा है.

 *_सवाल---- लोटे या गिलास को पांच उंगलियों से अगर कोई पकड़ ले तो वो पानी पीना कैसा है,कुछ लोग बोल रहे हैं कि जायज़ नहीं_* *_जवाब----- बिलकुल वो पानी पी सकते हैं कोई हरज नहीं-पानी से भरे लोटे  या बरतन को पांच उंगलियों से पकड़ने को बुरा जाना जाता है और मकरुह ख़्याल किया जाता है हालांकि यह एक जाहिलाना ख़्याल है पांच उंगलियों से अगर लोटे को पकड़ लिया जाए तो उससे पानी में कोई ख़राबी नहीं आती,_* *📕📚गलत फहमियां और उनकी इस्लाह सफह 20,*

कर्ज़ दार मस्जिद मेँ नमाज़ पढ़ना कैसा है

 *_सवाल----- हमारे यहाँ एक मस्जिद है जो अब क़र्ज़दार हो गई है,तो अब उस मस्जिद में नमाज़ पढ़ना कैसा?_* *_जवाब----- हुज़ूर मुफ्तिये आज़म हिन्द शहज़ाद ए आला ह़ज़रत मौलाना अश्शाह मुहम्मद मुस्तफा रज़ा खान क़ादरी बरेलवी तह़रीर फरमाते हैं कि जो मस्जिद हो चुकी ता क़यामत वह मस्जिद ही रहेगी,_* *📕📚फतावा मुस्तफ्विया सफह 268* *_लिहाज़ा जो मस्जिद किसी वजह से क़र्ज़दार हो जाये उस में नमाज़ पढ़ना जायज़ ही नहीं बल्कि ज़रुरी है ताकि वीरान ना हो- आला ह़ज़रत मुजद्दिदे आज़म इमाम अहमद रज़ा खान क़ादरी बरेलवी अलैहिर्रह़मा तह़रीर फरमाते हैं कि'' नमाज़ हर पाक जगह हो सकती है जहाँ कोई मुमानियत शरई ना हो अगर चेह किसी का मकान में हो या बेकार ज़मीन_* *📕📚फतावा रज़विया शरीफ जिल्द 6 सफह 459* *📕📚फतावा फिक़्य मिल्लत जिल्द 1 सफह  196*