नमाज़ का तरीक़ा

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📝 *सवाल :-* अच्छा अब मुझे यह बताइये कि रसूले खुदा सल्लल्लाहुअलैहि वसल्लम ने नमाज़ में क्या - क्या पढ़ने का हुक्म दिया है और किस तरह नमाज़ पढ़नी चाहिये ?

✍🏻 *जवाब :-* जो चीजें नमाज़ में पढ़ी जाती हैं उन सब के नाम और अल्फाज़ यह हैं। 


🔘 *तकबीर -* अल्लाहु अकबर (अल्लाह सब से बड़ा है) 


🔘 *सना :* सुबहानकल्लाहुम्म व बि हम्दि - क व तबा - र कस्मु - क व तआला जदु - क व ला इला - ह गैरू - क. 

*🔘 तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह हम तेरी पाकी का इकरार करते हैं और तेरी तारीफ़ बयान करते हैं और तेरा नाम बहुत बरकत वाला है और तेरी बुज़ुर्गी बरतर और तेरे सिवा कोई मुस्तहिके इबादत नहीं।


🔘 *तअव्वुज़* अऊजु बिल्लाहि मिन - शैता - निर - रजीम०

*🔘 तर्जुमा :-* मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूं शैतान मरदूद से।


🔘 *तसमीया* बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ०

*🔘 तर्जुमाः-* अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है। 


1️⃣ *सूरह फ़ातिहा* अलहम्दु लिल्लाहि रबिल आलमीन. अर रहमानिर् रहीम, मालिकि यौमिददीन, इय्या - क नअबुदु व इय्या - क नस् तयीन. एहदिनस - सिरातल् मुस्तकीम सिरातल - लज़ी - नअन् अम् - त अलैहिम, गैरिल मगजूबि अलैहिम् वलज - ज़ाल्लीन, आमीन. 

🔘 *तर्जुमा :-* तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिये जो सारे जहानों का पालने वाला बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है। रोजे जजा का मालिक है, ऐ अल्लाह हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते हैं कि सीधे रास्ते पर चला। उन लोगों के रास्ते पर जिन पर तूने इनआम फरमाया है, न उनके रास्ते पर जिन पर तेरा गजब नाजिल हुआ और न गुमराहों के रास्ते पर। 


2️⃣ *सूरह कौसर* 

इन्ना अअतैना कल कौसर, फसल्लि लि रबि - क वन्हर इन्न शानि -अ - क हुवल अब्तर 

*🔘 तर्जुमा :-* ऐ नबी हमने आपको कौसर अता की है। बस आप अपने रब के लिये नमाज़ पढ़िये और क़ुरबानी कीजिये। बेशक आपका दुश्मन ही बे नाम और निशान हो जाने वाला है।


3️⃣ *सूरह इख्लास-* कुल हुवल्लाहु अहद. अल्लाहुस - समद लम् यलिद, वलम् यूलद, वलम् यकुल - लहू कुफुवन अहद.

*🔘 तर्जुमाः-* (ऐ नबी) कह दीजिये वह अल्लाह एक है अल्लाह बे नियांज है उससे कोई पैदा नहीं हुआ और न वह किसी से और कोई उसका हमसर (बराबर) नहीं। 


*4️⃣ सूरह फलक* कुल अऊजु बि रबिल फलक . मिन् शरिमा खलक, व मिन् शरि ग़ासिकिन् इज़ा वकब व मिन शरिन् नफफ़ासाति फिल उकद व मिन् शरि हासिदिन इजा हसद, 

🔘 *तर्जुमाः-* कह दीजिये उसकी पनाह लेता हूं। जो सुबह का पैदा करने वाला है। उसकी सब मखलूक के शर से और अंधेरी डालने वाले के शर से जब वह डूबे और उन औरतों के शर से जो गिरहों में फूंकती हैं और हसद वाले के शर से जब वह मुझ से जले। 


*5️⃣ सूरह अन्नास*• कुल अऊ.जु बि रबिन् नासि. मलिकिन नासि इलाहिन् नासि. मिन शर् - रिल् - वस्वासिल खन्नास. अल्लज़ी युवस् विसु फी सुदूरिन् नास. मिनल जिन्नति वन्नास. 

🔘 *तर्जुमाः-* (ऐ नबी) कहो कि मैं आदमियों के रब की पनाह लेता हूं आदमियों के बादशाह आदमियों के माबूद की पनाह लेता हूं उस वस्वसा डालने वाले, पीछे हट जाने वाले के शर से जो लोगों के दिलों में वस्वसा डालते हैं जिन्नों में से हों या आदमियों में से। 


*✍🏻 रूकूअ की तस्बीह* सुबहान - रब्बियल अज़ीम, 

*📖 तर्जुमाः-* पाकी बयान करता हूं अपने परवरदिगार बुजुर्ग की। 


✍🏻 *कौमा यानी रुकूअ से खड़े होने की तस्बीह*- समिअल्लाहु लिमन हमिदह

📖 *तर्जुमाः-* अल्लाह तआला ने उसकी सुन ली जिसने उसकी तारीफ की। 


✍🏻 *इसी क़ौमा की तहमीद तस्बीह के बाद*- रब्बना लकल हम्द।

*📖 तर्जुमाः-* ऐ हमारे परवरदिगार तेरे लिये ही तमाम तारीफ़ है। 


✍🏻 *सज्दे की तस्बीह :* सुबहा - न रब्बियल आला 

📖 *तर्जुमा :-* पाकी बयान करता हूं मैं अपने परवरदिगार बरतर की। 


🔘 *तशहहुद या अत्तहिय्यात*


✍🏻 अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस् सलवातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलै - क अय्युहन् नबीय्यु व रह - मतुल्लाहि व ब - र - कातुहू अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्ला हिस्सालिहीन, अश - हदु अल्ला इला - ह इल्लल्लाहु व अश - हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू. 

📖 *तर्जुमाः-* सब इबादतें जो ज़बान बदन और माल से हो सकें अल्लाह ही के लिये है सलाम हो तुम पर ऐ नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें, सलामती हो हम पर और अल्लाह के नेक बन्दों पर, गवाही देता हूं मैं कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और गवाही देता हूं मैं कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुदा के बन्दे और रसूल हैं। 


*✍🏻 दुरूद शरीफ:* अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लै - त अला इब्राही - म व अला आलि इब्राही - म इन्न - क हमीदुम् - मजीद, अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिव व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक - त अला इब्राही - म व अला आलि इब्राही - म इन्न - क हमीदुम् मजीद ० 

📖 *तर्जुमा :-* ऐ अल्लाह हमारे आका सय्यदना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा जिस तरह तूने हज़रत सय्यदना इबराहीम अलैहिस्सलातु वस्सलाम और उनकी आल पर रहमत नाज़िल फरमाई है बेशक तू तारीफ़ और बुजुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह हमारे आका सय्यदना मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर और उनकी आल पर बरकत नाज़िल फरमा, जिस तरह तूने हजरत सय्यदना इबराहीम अलैहिस्सलाम और उनकी आल पर बरकतें नाज़िल फ़रमाई हैं बेशक तू तारीफ़ और बुजुर्गी वाला है। 


*✍🏻 दुरूद शरीफ़ के बाद की दुआ*

 अल्लाहुम्मा - फिरली वलि वालिदय्य व लिमन तवा - ल - द व लि जमीईल मुमिनी - न वल मुमिनाते वल मुस्लिमी - न वल मुस्लिमातिल अह्याअि मिन्हुम वल अम्वाति बि - रहमति - क या अरहमर राहिमीन. 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ अल्लाह मगफिरत फ़रमा मेरी और मेरे वालिदैन की और उनकी जो उनसे पैदा हुए और तमाम मोमिनीन व मोमिनात व मुस्लिमीन और मुस्लिमात (औरतें) की जो उनमें से जिन्दा हैं या मुर्दा अपनी रहमत के वसीले में ऐ अरहमुर राहिमीन। 


*✍🏻 सलाम:* अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह

*📖 तर्जुमाः-* सलाम हो तुम पर और अल्लाह की रहमत। 


*✍🏻 नमाज़ के बाद की दुआ* 

रब्बना आतिना फ़िद - दुन्या ह - स - नतंव व फिलआख़िरतिः ह - स- नतंव व - किना अज़ाबन् - नार, 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दुनिया में नेकी दे और आखिरत में हमको नेकी और हमको दोज़ख के आग से बचा। 


✍🏻 *दुआए कुनूत*: 

अल्लाहुम्मइन्ना नस्तीनु - क व नस्तगफिरु - क व नुअमिनु बि - क व न - त - वक्कलु अलै - क व नुस्नी अलैकल खैर व नश कुरु - क व ला नकफुरु - क व नखलउ व नतरूकु मंय्यफ जुरु - क अल्लाहुम्म इय्या - क नअबुदु व ल - क नुसल्ली व नस्जुदु इलै - क नस्आ व नह्फिदु व नरजू रहूम - त - क व नखशा अज़ाब - क इन्न अज़ाब - क बिल कुफ्फारि मुल्हिक. 

*📖 तर्जुमाः-* ऐ परवरदिगार हम तुझसे मदद चाहते हैं और तुझसे माफी मांगते हैं और ईमान लाते हैं तुझ पर औरभरोसा रखते हैं तुझ पर और तारीफ़ करते हैं तेरी अच्छी और हम तेरा शुक्र अदा करते हैं और हम नाशुक्री नहीं करते तेरी और हम उससे अलग होते हैं जो तेरी नाफरमानी करते हैं। ऐ अल्लाह तेरे ही लिये इबादत करते हैं और तेरे ही लिये नमाज़ पढ़ते और सज्दा करते हैं और तेरी ही तरफ दौड़ते हैं और हम तेरी खिदमत में हाज़िर हैं और उम्मीदवार हैं तेरी रहमत के और डरते हैं तेरे अज़ाब से बेशक तेरा अज़ाब काफिरों को मिलने वाला है। 


*📕 (इस्लामी तालीम, सफा नं. 17 से 25 तक)*


*📬 पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*


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